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बुधवार, 22 जनवरी 2014

दिल्ली दरबार

हाँ तो ऐसा है न कि केजरीवाल जी तबादले नाम के झुनझुने से मान  गए है । परदे के पीछे की कहानी न्यूज़ चैनल वाले कुछ - कुछ बता तो रहे थे पर हम फिर भी कहना चाहेंगे कि परदे के पीछे की कहानी हमें तो पता नहीं है । वैसे जो भी हुआ है अच्छा ही हुआ है क्योंकि अभी इन नौटंकियों का समय नहीं है ।
अभी तो हमें गणतंत्र दिवस कि तैयारियों में  ध्यान लगाना चाहिए क्योंकि केजरीवाल जी कि कृपा से दो दिन वैसे भी बड़ी मुश्किल से बीते है । मुझे नहीं पता कि केजरीवाल जी के मन में क्या है लेकिन मेरे मन में तो यही है कि ये समय सही नहीं था इस तरह बेवजह आम आदमी को परेशान करने के लिये । राजनीति चाहे अच्छी मंशा से हो या बुरी मंशा से मुझे लगता है राजनीति में अहं कि जगह नहीं होती है । वैसे ये भी सोचने कि बात है आज के परिप्रेक्ष्य में कि क्या राजनीति अच्छी मंशा से भी हो सकती है?
केजरीवाल जी ने कहा है कि जो किया सही किया । अब सही या गलत का सबका अपना-अपना अर्थ होता है और मेरे पास भी ये अधिकार तो है कि मैं घटनाओं को अपने तराजू में तौल सकता हूँ । मेरा मानना है कि जो हुआ गलत ही हुआ है और इसके पीछे कई कारण है । इन कारणों में से कुछ कारण जो मुझे अभी याद है, आप लोगों के साथ साझा करने कि कोशिश करता हूँ । 
पहला कारण जो मुझे लगता है वो ये है कि समय गलत था । इस समय जब दिल्ली हाई अलर्ट पर रहती है उस समय दिल्ली के प्रथम नागरिक को इस तरह कि हरकत शोभा नहीं देती है । आपकी इस हरकत से आम आदमी की सुरक्षा में कितनी बड़ी सेंधमारी हो सकती है इसका अगर आपको अंदाज़ा भी नहीं है तो आपको इस पद पर रहने का अधिकार मेरे हिसाब से तो नहीं है । 
दूसरा कारण ये है कि आप राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हो और अगर आप किसी समस्या के लिए देश के गृहमंत्री से मिलना अपनी बेइज्जती समझते हो तो आपको आत्ममंथन कि आवश्यकता है न कि अनशन कि नौटंकी करने कि । 
तीसरा कारण ये है कि आप एक तरीका जो कि आपके संविधान ने तय किया है उसको अपनाते और अगर फिर कोई आपकी बात नहीं सुनता तो आप अनशन करते और तब देखते कि ये आम आदमी आपको अपना पूर्ण समर्थन देता । 
आप अपने अहं कि वजह से गृहमंत्री से नहीं मिले और आपने सबको परेशान किया । आपका कहना है कि आप दिल्ली के मुख्यमंत्री हो और आपको दिल्ली पुलिस नहीं बता सकती है कि आपको क्या करना चाहिए तो केजरीवाल जी आपको बता दे कि दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय राजधानी की पुलिस है और दिल्ली को राज्य के समकक्ष दर्जा सिर्फ इसलिए दिया गया है क्योंकि उसको किसी प्रदेश में शामिल नहीं किया जा सकता है और दिल्ली कि मुलभुत समस्याओं के निराकरण के लिए एक संवेधानिक संस्था की आवश्यकता है । 
दिल्ली पुलिस को अगर आपके या दिल्ली के मुख्यमंत्री के हवाले कर दिया तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कि सुरक्षा राजनीति में फंस कर खतरे में पड़ सकती है । कैसे ये बताने कि आवश्यकता अब इस अनशन काण्ड के बाद तो नहीं होना चाहिए । अब जो आपका रूप आम आदमी देख रहा है वो तो यही सोच रहा है कि अब केजरीवाल हम से मैं बन गए है । 
मैं (ये मेरा वाला है आपका नहीं ) ये बात तो कह सकता हूँ कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो मान लीजिए कि ६ महीने बाद आपकी सरकार गिर जाती है तो दुबारा नहीं आ पायेगी । इस घटना को एक सबक के रूप में लीजिये और कोशिश कीजिये कि आपके कारण आम आदमी परेशान न हो । 
और जाते जाते कुछ अलग बात करते है और वो अलग बात ये है कि भारत फिर हार गया और नंबर १ कि कुर्सी के बेदखल हो गया, है न अलग बात :)

मंगलवार, 21 जनवरी 2014

केजरीवाल का बालहठ

"If you don't like the rule, follow the rule, reach the top and change the rule..."

ये पंक्तियाँ मैंने कहीं पढी थी और मुझे सही भी लगी थी लेकिन आजकल केजरीवाल जी के तथाकथित आंदोलनों को देख कर लग रहा है कि वो सिर्फ सत्ता सुख चाहते है उन्हें आम आदमी या आम आदमी को परेशान करने वाले नियमों से कोई लेना-देना नहीं है । ताज़ा आंदोलन तो इसी बात को प्रदर्शित कर रहा है । उन्हें दिल्ली की जनता ने एक मौका ये सोच कर दिया है कि ये बंदा परिवर्तन लायेगा लेकिन वो तो अब बस अपनी ताक़त को बढाने में लग गए है ।
मुझे ये समझ नहीं आ रहा है कि क्यों केजरीवाल दिल्ली कि पुलिस के मुद्दे को सही तरीके से हल नहीं करना चाहते है । हर बात को करने का एक तरीका होता है और अगर हमें वो तरीका पसंद नहीं है और हमारे पास उससे बेहतर तरीका है तो हमें अपने आप को इस काबिल बनाना चाहिए कि हम बदलाव कर सके न कि इस तरह गैर ज़िम्मेदाराना तरीके अपनाने चाहिए । आप एक प्रदेश के मुख्यमंत्री हो और उस पद कि गरिमा रखना आपका दायित्व है ।  आप तो बस जा कर धरने पर बैठ गए, आपने ये क्यों नहीं सोचा कि गणतंत्र दिवस पास में है और आप जिस क्षेत्र के मुख्यमंत्री हो वो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र भी है । अगर कल को कुछ भी उंच-नीच हो जाती है तो उसकी जिम्मेदारी तो आप झट से केंद्र सरकार पर डाल दोगे कि इनकी गलती क्योंकि पुलिस तो इनके मातहत काम करती है , आप ये नहीं सोचना चाहते हो कि यदि आप अभी ये मुद्दे इस तरह से उठाओगे तो पुलिस को कितनी परेशानी होगी ।
इस समय पूरा ध्यान गणतंत्र दिवस पर होना चाहिए कि उस समय कोई अनहोनी न हो और आपको इसमें सहयोग करना चाहिए न कि बच्चो सामान ज़िद पर अड़ जाना । इस समय आम जनता कि सुरक्षा कि चिंता होनी चाहिए न कि अपने मंत्री को बचाने की कवायद कि जानी चाहिए । आपके इस आंदोलन से आम जनता को तो स्पष्ट नज़र आ रहा है कि ये आपके और आपके मंत्री कि अहं कि लड़ाई है और कुछ नहीं ।
आपका कहना है कि मेट्रो स्टेशन आपने बंद नहीं करवाये केंद्र ने करवाये है और पुलिस ने करवाये है । ठीक है माना उन्होंने करवाये है लेकिन कारण तो आप ही हो न आप मानो या न मानो । अगर आपके अनशन का फायदा उठा कर अराजक तत्त्व मेट्रो में फ्री घूस जाते है और उत्पात मचाते है तो उसका जिम्मेदार तो आप केंद्र और पुलिस को बोल दोगे बिना ये सोचे के उनको गणतंत्र दिवस के पहले बहुत सी तैयारियां करनी होती है और हर जगह सघन तलाशी अभियान चलाने होते है । ऐसे में वो आपके अनशन स्थल के आस-पास ध्यान दे या पूरी दिल्ली कि सुरक्षा पर ध्यान दे ।
केजरीवाल जी आपको जनता ने मौका दिया है उसको इस तरह गवाओं नहीं । ये जो आप कर रहे हो ये बालहठ से ज्यादा कुछ नहीं है । अगर वाकई कुछ करना चाहते हो तो एक प्रक्रिया का पालन करो । अगर उस प्रक्रिया से हल नहीं निकलता है तो जहाँ कमी है वहाँ पहुँचने कि कोशिश करो और प्रक्रिया बदलो यूँ आम जनता को परेशान नहीं करो ।
और हाँ जब दिल्ली में निर्भया बलात्कार हुआ था तब आपने शीला दीक्षित को इसका ज़िम्मेदार माना था और उनके इस बयान पर कि दिल्ली पुलिस उनके अधीन नहीं है कहा था कि वो बहाना बना रही है और मुद्दों से भटका रही है और अब आप भी इस अनशन कि नौटंकी से वही तो कर रहे हो । 
शनिवार, 18 जनवरी 2014

मदद में स्वार्थ नहीं ढूंढे ...

जनवरी कि एक सर्द शाम को मेरे शहर भोपाल में बादल खूब जम कर बरस चुके थे । मैंने जब देखा कि बारिश और हो सकती है तो मैंने अपना सारा सामान अपने वॉटर-प्रूफ़ बैग में डाला और मैं निकल पड़ा अपने ऑफिस से घर जाने के लिये । मेरे ऑफिस और घर के रास्ते में एक रेलवे क्रासिंग पड़ती है और मुख्य मार्ग से उस क्रासिंग तक जाने के दो रास्ते हैं । एक रास्ता जिसको हम पक्का रास्ता बोल सकते है क्योंकि उस पर बहुत ज्यादा टूटी-फूटी ही सही मगर एक सड़क बनी हुई है और एक मिट्टी का कच्चा रास्ता है जो किसी ने बनाया नहीं है अपने आप बन गया है और जब बारिश न हो तब वो रास्ता पक्के रास्ते से ज्यादा समतल रहता है ।
तो मैं जब उस रेलवे क्रासिंग के करीब पहुँच रहा था तब बारिश के बावजूद मैंने पता नहीं क्यों उस कच्चे रास्ते हो चुन लिया और कुछ दूरी पार करते ही मैं अपनी बाइक समेत कीचड़ में बुरी तरह से फंस गया । मैंने देखा कुछ दूरी पर एक और व्यक्ति फंसा हुआ था और अपनी बाइक कीचड़ से निकालने कि कोशिश कर रहा था । मैं भी अपनी बाइक  निकालने कि कोशिशों में जुट गया । 
जब मैं बाइक  निकालने की कोशिश कर रहा था तभी मुझे उस ओर एक और बाइक आती नज़र आयी । मैंने उसे तुरंत रुकने का इशारा किया और बोला कि," यहाँ मत आओ, बहुत ज्यादा कीचड़ है और तुम बाइक समेत फंस जाओगे " तो उस पर सवार लड़के ने अपनी बाइक तुरंत रोक दी और कुछ दूर पैदल चल कर मेरी तरफ आने लगा । मैंने उसके पहनावे को देख कर कहा कि, "यहाँ मत आओ तुम्हारे जूते और कपडे कीचड़ में ख़राब हो जायेंगे, जैसे मेरे हो गए हैं "। मेरा ये बोलने के बाद जो उस लड़के ने बोला वो मेरे मानस पटल पर बहुत गहरी छाप छोड़ गया, वो बोला कि, " भैया अगर आप मुझे नहीं रोकते तो मेरे जूते और कपडे तो ख़राब होने ही थे, आपके बोलने के कारण मेरी बाइक इस कीचड़ में फंसने से बच गयी और आपकी बाइक भारी है आप अकेले नहीं निकाल पाओगे" ।
फिर उसने मेरी बाइक निकलने में मेरी मदद की, बिना किसी झिझक और परवाह किये । मेरी बाइक निकलवाने के बाद उस लड़के ने उस दूसरे व्यक्ति कि भी मदद कि और उसकी बाइक भी बाहर निकलवा दी । फिर वो लड़का बोला कि, " भैया अब आप पहियों को थोड़ा साफ़ करके घर जा सकते हो", और ऐसा कह कर वो अपनी बाइक ले कर चला गया । वैसे तो मैंने उस लड़के को धन्यवाद बोला था उसकी इस मदद के लिए लेकिन मुझे अब भी लग रहा है कि शायद वो धन्यवाद कम था । इस उहापोह कि स्थिति में मैं उस लड़के से उसका नाम भी पूछना भूल गया और ये बात मुझे शायद पूरी ज़िन्दगी परेशान करेगी । 
एक न भूलने वाला सबक वो मुझे दे गया था कि आप जिस तरह और जितनी मदद कर सकते हो करो और मदद के समय ये मत देखो कि आप जिसकी मदद कर रहे हो वो आपका परिचित है या नहीं ...
धन्यवाद दोस्त... ईश्वर करे कि मैं तुमसे दुबारा मिलने का मौका मिले और धन्यवाद मुझे ये सीखने के लिखे कि मदद निस्वार्थ भाव से भी कि जा सकती है । 
यह घटना मेरे साथ जनवरी १८, २०१४ को बावर्ची ढाबे के पास होशंगाबाद रोड पर शाम ६:३० के आस-पास घटित हुई थी । 

बुधवार, 15 जनवरी 2014

भारतीय राजनीति : आजकल

भारतीय राजनीति आजकल एक नए दौर से गुजर रही है । इस नए दौर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं ।  अरविन्द केजरीवाल ने जब से आम आदमी पार्टी या यूँ कहे कि आप का गठन किया है तब से इस दौर कि  शुरुआत मानी जा सकती है ।  जब आप का गठन हुआ था तब सभी पार्टियों ने इस नयी पहल को बहुत हलके में  था लेकिन दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों के बाद स्थितियाँ  बहुत बदल गयी है ।
दिल्ली विधानसभा चुनावों ने भारत कि सभी राजनैतिक पार्टियों को एक अति-महत्वपूर्ण सिख दी है कि सुधर जाओ नहीं तो खत्म कर दिए जाओगे । वैसे दिल्ली केजरीवाल का कर्मक्षेत्र रहा है और मेरे हिसाब से सिर्फ वहाँ मिली सफलता से आप को अतिउत्साहित नहीं होना चाहिए जो कि आजकल नज़र आ रहा है ।
कुमार विश्वास का अमेठी से चुनाव लड़ना मेरे हिसाब से उस अति उत्साह का ही नतीज़ा है । आप को लगता है कि जैसे वो दिल्ली में शीला दीक्षित को हरा सकते है वैसे ही अमेठी में राहुल गांधी को हरा देंगे तो मेरा यह मानना है कि शीला दीक्षित को खुद अरविन्द केजरीवाल ने हराया था और कुमार विश्वास चाह कर भी केजरीवाल नहीं बन सकते है । अमेठी में राहुल गांधी ने एक सांसद के तौर पर बहुत काम किया है और उनकी पार्टी कि धूमिल होती छवि से उन्हें शायद ही कोई व्यक्तिगत नुक़सान हो ।
आप नेता योगेन्द्र यादव जी का कहना कहना है कि मुकाबला आप और बीजेपी में है और कांग्रेस कहीं भी तस्वीर में नहीं हैं । योगेन्द्र जी कांग्रेस का तो इस बार बुरा हाल होना तय था चाहे आप होती या न होती, आप के आ जाने से नुक़सान बीजेपी को ही होगा । मुझे और बीजेपी के ताज़ा बयानों को देख कर ऐसा लगता है कि आप और बीजेपी कि लड़ाई में कांग्रेस को फायदा हो सकता है क्योंकि आप के आने से बीजेपी का वोट बैंक आप की तरफ जा सकता है और अगर ऐसा हुआ तो कम वोट के सहारे ही सही कांग्रेस नुकसान को कम सकती है । भैया ऐसा है कि दो बिल्लियों कि लड़ाई में अक्सर फायदा बन्दर को हो जाता है ।
नमो आप से डर गए है क्योंकि यदि आप ने उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अपने उम्मीदवार उतार दिए तो नुक़सान सबसे ज्यादा बीजेपी को ही होगा । उत्तर प्रदेश में आप समेत ५ पार्टियां प्रमुखता से चुनाव लड़ेंगी और सपा-बसपा के वजूद को नकारना गलत होगा । महाराष्ट्र में तो शिव सेना, राज ठाकरे, एन सी पी की पकड़ बहुत ज्यादा है तभी तो बीजेपी को शिव सेना और कांग्रेस को एन सी पी का सहारा है । हाँ मध्य प्रदेश और गुजरात में कोई बड़ा नुक़सान बीजेपी को होता नज़र नहीं आ रहा है लेकिन नमो को प्रधानमंत्री बनना है तो बीजेपी को एकला चलो ही अपनाना पड़ेगा ।
वैसे आप और कांग्रेस दोनों आजकल एक ही समस्या से दो चार हो रहे है और वो है उनके भस्मासुर । दोनों ही पार्टियों के पास भस्मासुरों कि कमी नहीं और अगर समय रहते इनसे नहीं निपटा गया तो दोनों को नुकसान होना तय है । मुझे नहीं लगता कि मुझे यहाँ आप या कांग्रेस को भस्मासुरों  बताने ज़रूरी हैं ।
अंततः मुझे जो समझ आया है अभी तहतक वो यह है कि बीजेपी पूरी ताकत से नमो को प्रधानमंत्री बनाना छह रही है, कांग्रेसी राहुल पार्को जितवाने कि कोशिश करने की जगह उनसे ये उम्मीद पाले बैठे है कि ये हमें जितवाएगा और आप तो बस आप है उनको क्या कहें...